हिटलर मरा नहीं
अशोक तिवारी
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हिटलर मरा नहीं
हिटलर मरते नहीं
आवाजाही करते हैं इतिहास के पन्नों में
परिवर्तित होते हैं
एक रूप से दूसरों में
एक मुल्क में ही नहीं
दुनियाभर में करता है सैर हिटलर
नहीं है जिसकी कोई एक शक्ल-ओ-सूरत
तमाम मुखोंटों के साथ
आता है वो हमारे सामने
काल और समय से परे
वो अमर है- अजर है
अवतार है
अन्तर्यामी है
वो यहाँ भी है - वहां भी है
इधर भी है -उधर भी है
स्वर्ग में भी-नरक में भी
ज्ञानी है - ध्यानी है
वो सबसे बड़ा इतिहास वेत्ता है
मनो विज्ञानी है
मौसम विज्ञानी है
शिक्षा शास्त्री - वैज्ञानिक है
लेखक है, कवि और शायर है
वो क्या क्या नहीं है ....
किसी एक मुल्क में नहीं...
वो बढ़ा रहा अपना पंजा
दुनियाभर की उन सारी जगहों पर भी
जानी जाती हैं जो
लोकतंत्र के लिए,
भाईचारे, सुकून और चैन-ओ-अमन के लिए
उसी
तरह जैसे
हिंदुस्तान
की सरजमीं पर
नजर
आया था सदियों पहले
तबाही
के भीषण मंज़र के साथ
पुष्यमित्र
शुंग..
हिटलर मरा नहीं
हिटलर मरते नहीं
आवाजाही करते हैं इतिहास के पन्नों में
ज़बरदस्ती
अपनी उपस्थिति दर्ज कराने
आत्महत्या तो महज़ छलावा था
झूठ था उसी तरह
बोलता रहा जिस तरह वो ताउम्र
दुश्मनों के लिए
बो दिए विष-बीज जिसने
अपनी महानता के गीत गाते हुए
हो सकें ताकि दुश्मन नेस्तनाबूत
दुश्मन जो
नफ़रत से परे
प्यार-मुहब्बत और ख़ुलूस की बात करता है
दुश्मन जो
रंग-बिरंगे फूलों को खिलाने की बात करता है
असहमति की बात करता है
संविधान की बात करता है
दुश्मन जो
गोली की एवज़ में
पत्थर चलाने की बात करता है
तिरंगे में खुद को लपेटकर
बचाने की बात करता है
गंगा-जमुनी तहजीब की बात करता है
हिंदुस्तानियत की बात करता है
हिटलर मरा नहीं
हिटलर मरते नहीं
हिटलर मरेंगे भी नहीं
वो रहेंगे हमारे आसपास
चौकन्ना रहना होगा
हम दुश्मनों को
आवाजाही करते इतिहास के पन्नों में दर्ज़
इन किरदारों से
उनकी मीठी नज़र और विषपान से
छलावों और कुटिल मुस्कान से !!
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14/01/2020